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चौक, डस्टर और अनिश्चित भविष्य: देश के अतिथि

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  चौक, डस्टर और अनिश्चित भविष्य: देश के अतिथि शिक्षकों की अनदेखी दास्तान कक्षा में प्रवेश करते ही बच्चों के चेहरे पर खिली मुस्कान किसी भी शिक्षक की सबसे बड़ी पूंजी होती है। हाथ में सफेद चाक और सामने ब्लैकबोर्ड लिए जब एक शिक्षक खड़ा होता है, तो वह केवल पाठ्यक्रम पूरा नहीं करा रहा होता, बल्कि देश की नई पीढ़ी की नींव रख रहा होता है। लेकिन क्या कभी किसी ने उस शिक्षक की जेब और उसके भविष्य की ओर देखा है? हमारे सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ बन चुके ‘अतिथि शिक्षक’ (Guest Teachers) आज इसी सवाल के बोझ तले जी रहे हैं। एक स्थायी शिक्षक की तरह ही वे सुबह प्रार्थना सभा से लेकर शाम की घंटी तक पूरी निष्ठा से पढ़ाते हैं। परीक्षा की कॉपियां जांचना हो, खेलकूद का आयोजन हो या चुनाव से लेकर जनगणना जैसी गैर-शैक्षणिक ड्यूटी—अतिथि शिक्षक हर मोर्चे पर आगे रहते हैं। अंतर बस इतना है कि महीने के अंत में मिलने वाला मानदेय एक कुशल मजदूर के वेतन से भी कम बैठता है, और सिर पर हर वक्त ‘कल हटा दिए जाने’ की तलवार लटकी रहती है। 'समान काम, समान वेतन' का सपना अतिथि शिक्षकों की सबसे बड़ी विडंबन...

अतिथि शिक्षक नियुक्ति विवाद: अगर आपके साथ भी हो रहा है अन्याय, तो चुप न रहें—सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं!

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 अतिथि शिक्षक नियुक्ति विवाद: अगर आपके साथ भी हो रहा है अन्याय, तो चुप न रहें—सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं! शिक्षा व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में अतिथि शिक्षकों (Guest Teachers) का योगदान किसी से छिपा नहीं है। लेकिन आए दिन देखने को मिलता है कि निष्पक्ष चयन प्रक्रियाओं और मेरिट सूची को दरकिनार कर अपात्र लोगों को अवसर दे दिया जाता है। हाल ही में शासकीय हाई स्कूल उकावद (मधुसूदनगढ़) से सामने आई एक खबर इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि अगर अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई जाए, तो न्याय जरूर मिलता है। क्या था पूरा मामला? शासकीय हाई स्कूल उकावद में अतिथि शिक्षक की नियुक्ति को लेकर एक विवाद खड़ा हुआ था। आरोप था कि निर्धारित मेरिट सूची में अधिक अंक वाले पात्र अभ्यर्थियों को नजरअंदाज कर दिया गया और कम अंक वाले अभ्यर्थी को जॉइनिंग दे दी गई। जब पीड़ित अभ्यर्थी और स्थानीय लोगों ने इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और मामला मीडिया में आया, तो शिक्षा विभाग को संज्ञान लेना पड़ा। विभागीय जांच में शिकायत पूरी तरह सही पाई गई। जांच के बाद नियम विरुद्ध हुई नियुक्ति को रद्द किया गया और अधिक अंक वाले पा...

बड़ी खुशखबरी! 90% E-Attendance की शर्त खत्म | अब सबकी होगी जॉइनिंग!

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  यह आदेश लोक शिक्षण संचालनालय, मध्य प्रदेश (भोपाल) द्वारा 24 जुलाई 2026 को जारी किया गया है। इसका विषय शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अतिथि शिक्षकों (Guest Teachers) की री-जॉइनिंग (Re-joining) और e-Attendance (ई-अटेंडेंस) के नियमों में दी गई छूट से संबंधित है। आइए इस पत्र के एक-एक बिंदु का विस्तार से विश्लेषण करते हैं: 1. मुख्य विषय एवं पृष्ठभूमि (Context) पूर्व नियम (संदर्भ पत्र): 30 जून 2026 को जारी पत्र के अनुसार, अतिथि शिक्षकों की री-जॉइनिंग केवल portal पर उनकी e-Attendance (ई-अटेंडेंस) के रिकॉर्ड के आधार पर होनी थी। शर्त क्या थी? शैक्षणिक सत्र 2026-27 में री-जॉइनिंग के लिए कम से कम 90% ई-अटेंडेंस अनिवार्य की गई थी। 2. नया निर्णय और दी गई छूट (Main Relaxation) अतिथि शिक्षकों की ओर से प्राप्त आवेदनों और व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए विभाग ने सहानुभूतिपूर्वक विचार करके राहत दी है : 90% ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता में छूट (शिथिलता): सत्र 2026-27 के लिए 90% ई-अटेंडेंस की शर्त को हटा दिया/शिथिल कर दिया गया है । वचन पत्र (Undertaking): जिन अतिथि शिक्षकों की री-जॉइनिंग ह...